madhumakhi palan: मधुमक्खी पालन क्या है? यहां जानिए, मधुमक्खी पालन कैसे शुरू करें?

madhumakhi palan: मधुमक्खी पालन कृषि से जुड़ा एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है। कृषि से जुड़े लोग या फिर बेरोजगार युवक इस व्यवसाय को आसानी से कर सकते हैं। शहद उत्पादन में भारत का विश्व में पांचवा स्थान है। हमारे देश में पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, हिमाचल और उत्तराखंड प्रमुख राज्य हैं। 

मधुमक्खी पालन (Bee Keeping Farming) जिसमें कम लागत और अधिक मुनाफा है। आज हम इस ब्लॉग में मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) के विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे आप इस मधुमक्खी पालन को समझ सकें। 

तो आइए, The Rural India के इस ब्लॉग में मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) से जुड़ें महत्वपूर्ण बिंदुओं को जानें। 

इस ब्लॉग में आप जानेंगे।

  • मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) क्या है?
  • मधुमक्खी पालन के तरीके
  • मधुमक्खी पालन के लिए उपयुक्त समय और वातावरण
  • मधुमक्खियों के प्रकार
  • मधुमक्खियों के शत्रु
  • मधुमक्खियों की प्रमुख बीमारियां
  • बीमारियों का निवारण
  • मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) से मिलने वाले उत्पाद
  • मधुमक्खी पालन के लिए सामग्री
  • सरकार से मिलने वाली मदद
  • कम लागत में अधिक मुनाफा का उदाहरण
  • मधुमक्खी पालन से कमाई कैसे करें

 सबसे पहले जानते हैं, मधुमक्खी पालन (Bee Farming) क्या है?

मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan)

मधुमक्खी पालन (Bee Keeping) एक  ऐसा कृषि व्यवसाय है। जिसमें शहद या मोम के लिए मधुमक्खियां पाली जाती हैं। आजकल मधुमक्खी पालन का व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में बेहद अहम भूमिका निभा रहा है। किसान चाहें तो मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) की शुरुआत छोटे स्तर से करके भी लाखों रुपए कमा सकते हैं। इस व्यवसाय का सीधा संबंध खेती-बाड़ी, बागवानी, फलोत्पादन से है। 

मधुमक्खी पालन के तरीके (Beekeeping Methods)

मधुमक्खियां प्रायः दो विधियों से पाली जाती है। 

  1. परंपरागत मधुमक्खी पालन (traditional beekeeping)
  2. वैज्ञानिक ढंग से मधुमक्खी पालन (scientific beekeeping)

1. परंपरागत मधुमक्खी पालन (traditional beekeeping)

भारत में सैकड़ों वर्ष पहले से मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) किया जाता रहा है। परंपरागत मधुमक्खी पालन में मिट्टी के घड़ों में, लकड़ी के संदूकों में, पेड़ के तनों के खोखलों में या दीवार की दरारों में हम आज भी मधुमक्खियों को पालते हैं। मधु से भरे छत्तों से शहद प्राप्त करने के लिए छत्तों को काटकर या तो निचोड़ दिया जाता है या आग पर रखकर उबाल दिया जाता है। फिर इस शहद को कपड़े से छान लेते हैं। इस विधि से मैला एवं अशुद्ध शहद ही मिल सकता है, जो कम कीमत में बिकता है।

2. वैज्ञानिक ढंग से मधुमक्खी पालन (scientific beekeeping)

कई देशों में मधुमक्खियों को आधुनिक ढंग से लकड़ी के बने हुए संदूकों में, जिसे आधुनिक मधुमक्खी का छत्ता कहते हैं। इस प्रकार से मधुमक्खियों को पालने से अंडे एवं बच्चे वाले छत्तों को हानि नहीं पहुंचती। शहद अलग छत्तों में भरा जाता है और इस शहद को बिना छत्तों को काटे मशीन द्वारा निकाल लिया जाता है। इन खाली छत्तों को वापस मधुमक्षिकागृह (बॉक्स) में रख दिया जाता है, ताकि मधुमक्खियां इन पर बैठकर फिर से मधु (शहद) इकट्ठा करना शुरू कर दें।

मधुमक्खी पालन के लिए उपयुक्त समय और वातावरण 

मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) के लिए अक्टूबर से लेकर फरवरी तक का महीना सबसे उपयुक्त होता है। इस दौरान मधुमक्खियों के लिए तापमान सबसे सही होता है और इसी मौसम में रानी मक्खी ज्यादा तादाद में अंडे देती है। वसंत ऋतु में फूलों की संख्या सबसे अधिक होती है इसे इन महीनों में फूलों की खेती के साथ-साध मधुमक्खी पालन फायदेमंद होता है। 

सूरजमुखी, गाजर, मिर्च, सोयाबीन, पॉपीलेनटिल्स ग्रैम, फलदार पेड़ में जैसे नींबू, कीनू, आंवला, पपीता, अमरूद, आम, संतरा, मौसमी, अंगूर, यूकेलिप्टस और गुलमोहर जैसे पेड़ वाले क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन आसानी से किया जा सकता है। इससे आपकी आय में 20 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होती है। 

मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) की जगह समतल होनी चाहिए जहां भरपूर मात्रा में पानी, हवा, छाया और हल्की धूप होनी चाहिए। मधुमक्खी पालन की जगह के चारों ओर 1 से 2 किलोमीटर तक अमरूद, जामुन, केला, नारियल, नाशपाती और फूलों के पेड़ पौधे लगे होने चाहिए।

आइए, अब जानते हैं मधुमक्खियों की विभिन्न प्रजातियों के विषय में। 

मधुमक्खी के प्रकार (type of bee)

मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) व्यवसाय के लिए 4 तरह की मधुमक्खियां इस्तेमाल होती हैं। ये हैं-

  1. एपिस मेलीफेरा
  2. एपिस इंडिका
  3. एपिस डोरसाला
  4. एपिस फ्लोरिया

मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) के लिए एपिस मेलीफेरा मक्खियां ही अधिक शहद उत्पादन करने वाली और स्वभाव की शांत होती हैं। इन्हें डिब्बों में आसानी से पाला जा सकता है। इस प्रजाति की रानी मक्खी में अंडे देने की क्षमता भी अधिक होती है।

कार्य अनुसार मधुमक्खियों के प्रकार

  1. रानी मधुमक्खी
  2. श्रमिक मधुमक्खियां
  3. नर मधुमक्खी

1. रानी मधुमक्खी (Rani madhumakhi) 

अंडे देने का काम रानी मधुमक्खी ही करती है। इन अंडों की रखवाली का काम अन्य मधुमक्खियां करती हैं।

2. श्रमिक मधुमक्खियां (shramik madhumakhi)

श्रमिक मधुमक्खियां छत्ते में सबसे अधिक संख्या में होती हैं। इनके पेट पर कई समांनातर धारियां होती हैं। डंक मारने वाली यही मधुमक्खी होती है। इन मधुमक्खियों की अधिकता पर ही शहद जमा करने की मात्रा भी निर्भर करती है।

3. नर मधुमक्खी (Nar madhumakhi)

नर मधुमक्खी का काम रानी का गर्भाधान करना होता है। इसे और कोई भी काम नहीं करना पड़ता। नर मधुमक्खी छत्तों में जमा किया मधु खाता रहता है। यह श्रमिक मधुमक्खी से कुछ बड़ा और रानी से छोटा होता है।

मधुमक्खियों के शत्रु (bee enemies)

  • मोमी कीड़ा
  • ड्रैगन फ्लाई
  • मकड़ी
  • गिरगिट
  • बंदर
  • भालू

मधुमक्खियों की प्रमुख बीमारियां

अमेरिकन फॉलब्रूड (american foulbrood)

अमेरिकन फॉलब्रूड (american foulbrood) बंद लार्वा की बीमारी है जो बीजाणु-निर्माण करने वाले बैक्टेरिया पैनीबेसीलस लार्वा की वजह से होती है। वयस्क मधुमक्खियों को इस रोगाणुओं से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। लेकिन, वयस्क कर्मचारी मधुमक्खियां छोटे लार्वा को प्रदूषित शहद  खिलाते समय, अनजाने में इस रोग को फैलाने का काम करती हैं। 

अक्सर नए मधुमक्खी पालकों के पास इतना अनुभव नहीं होता जिसकी वजह से वे कालोनी का विभाजन करते समय अक्सर स्वस्थ कालोनियों में संक्रमित फ्रेमों की अदला-बदली करके इस रोग को फैलाने में सहायता करते हैं। इसलिए, पहले वर्ष छत्ते का निरीक्षण और कालोनी विभाजन करते समय अनुभवी मधुमक्खी पालकों का सहयोग प्राप्त करके आप बहुत सारी परेशानी से बच सकते हैं।

यूरोपियन फॉलब्रूड (European Foulbrood)

यूरोपियन फॉलब्रूड (European Foulbrood) बीमारी मेलिसोकोकस प्लूटोनिस रोगाणु के कारण होता है, जो पैनीबेसीलस रोगाणु की तरह बीजाणुओं का निर्माण नहीं करते हैं। इसलिए इससे संक्रमित कॉलोनियां बहुत कम ही मरती हैं। लेकिन, कालोनी में मधुमक्खियों की संख्या बहुत ज्यादा प्रभावित हो सकती है। संक्रमित कालोनी में नई रानी लाने से कभी-कभी इस बीमारी का प्रसार कम किया जा सकता है।

नोजेमा (nosema)

नोजेमा (nosema) वयस्क मधुमक्खियों की सबसे गंभीर बीमारी है और कर्मचारियों, नर मधुमक्खियों और यहाँ तक कि रानी को भी प्रभावित कर सकती है। यह नोज़ेमा एपिस और नोज़ेमा सेरेने प्रोटोज़ोआ के कारण होता है। इसमें ज्यादातर संक्रमित मधुमक्खियां गंभीर पेचिश रोग से ग्रस्त हो जाती हैं और छत्ते के अंदर मल-मूत्र त्यागकर सकती हैं, जो सामान्य स्थितियों में कभी भी इतना ज्यादा नहीं होता है। छत्ते के अंदर मल-मूत्र त्याग की वजह से रोग फैलता है। संक्रमित कर्मचारी मधुमक्खियां बहुत ज्यादा कमजोर हो जाती हैं और छत्ते के भारी काम को संभाल नहीं पाती हैं। भोजन के लिए घूमने वाली मधुमक्खियां अक्सर अत्यधिक थक जाती हैं और छत्ते पर आने से पहले ही मर जाती हैं।

बीमारियों का निवारण (prevention of diseases)

मधुमक्खियों को उपरोक्त बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर फॉर्मिक एसिड और सल्फर का छिड़काव करना चाहिए।

मधुमक्खी पालन से मिलने वाले उत्पाद (beekeeping products)

मधुमक्खी पालन खासतौर पर शहद मोम रॉयल जेली आदि के उत्पादन के लिए किया जाता है ।

शहद (Honey)

मधुमक्खियां फूलों के पराग कण को संचित कर अपने अंदर रखती है और फूलों के रस को अपने छत्ते में जमा करती है और उन्ही फूलों के रस को शहद में बदल देती है।

शहद (Honey) एक ऐसी चीज है जो खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी परिपूर्ण होता है। शहद अकेले ही विटामिन बी और विटामिन सी के अलावा कैल्शियम आयरन और कार्बोहाइड्रेट का भी प्राकृतिक स्रोत है। शहद में एंटीसेप्टिक एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं। इस लाल-पीले गाढे पदार्थ में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जिससे नियमित सेवन से हमें बहुत सी बीमारियों से निजात मिल सकता है। 

शहद में अनेक औषधीय गुण होने के कारण कोरोना जैसे वैश्विक महामारी के दौरान शहद के मांग कई गुना बढ़ गई थी। इस प्रकार मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) आर्थिक दृष्टिकोण से एक लाभकारी व्यवसाय है।

मोम (wax)

शहद के बाद दूसरा मूल्यवान तथा उपयोगी पदार्थ,जो मधुमक्खियों से मिलता है, वह मोम (wax) है। इसी से वे अपने छत्ते बनाती हैं। मोम (wax) बनाने के लिए मधुमक्खियां पहले शहद खाती हैं, फिर उससे गर्मी पैदाकर अपनी ग्रंथियों द्वारा छोटे- छोटे मोम के टुकड़े बाहर निकालती हैं।

रॉयल जेली (royal jelly)

स्पाइसी-एसेडिक मीठे स्वाद वाली रॉयल जेली (Royal jelly) युवा मधुमक्खियों (Bees) द्वारा स्रावित एक स्वस्थ्य खाद्य पदार्थ है। रॉयल जेली का उत्पादन भी मधुमक्खियों के छत्ते से होता है लेकिन इसका प्रयोग रानी मधुमक्खी के भोजन के रूप में किया जाता है। इसे रॉयल जेली शहद भी कहा जाता है।

शहद खाने के फायदे (benefits of honey)

  • शहद शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
  • शहद धमनियों और खून की सफाई करता है,गले के संक्रमण में भी लाभदायी है।
  • शहद का एक चम्मच ताजे मक्खन के साथ खाने से बुखार नहीं होता।
  • बच्चों को शहद देने से उनकी याददाश्त बढ़ती है।
  • खांसी, जुकाम, पाचन क्रिया, नेत्र विकार, रक्तचाप और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका प्रयोग होता है।

मधुमक्खी पालन के लिए सामग्री (materials for beekeeping)

  • लकड़ी का बॉक्स
  • बॉक्सफ्रेम
  • मुंह पर ढकने के लिए जालीदार कवर
  • दस्तानें
  • चाकू
  • शहद
  • रिमूविंग मशीन
  • शहद इकट्ठा करने के लिए ड्रम

यह तो हुई मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) से जुड़ी बातें अब  मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जुड़ी कुछ बातें करते हैं जिससे हमारे पाठकों को सरकार से मिलने वाली मदद की जानकारी मिल सकें। 

मधमुक्खी पालन के लिए सरकारी मदद

मधमुक्खी पालन व्यवसाय को शुरू करने के लिए सरकार हनी प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना में मदद करती है इस प्लांट की स्थापना के लिए कुल लागत का 65 फीसद हिस्सा कर्ज के तौर पर दिया जाता है इस कर्ज के अलावा सरकार के तरफ से 25 फीसद की सब्सिडी भी प्राप्त होती है इस तरह से उद्यमी को कुल लागत का केवल 10 परसेंट ही अपने पास से लगाना होता है यदि कुल लागत 24,50,000 आती है तो लगभग 1600000 रुपए ऋण के तौर पर मिल जाएगा और मार्जिन राशि के रूप में उद्यमी को कुल ₹ 600000 मिल जाते हैं। इस तरह मधमुक्खी पालन व्यवसाय (madhumakhi palan) में उद्यमी को अपने पास से केवल ₹ 200000 ही लगाने की जरूरत होती है।

कम लागत अधिक मुनाफा का उदाहरण

अगर आप चाहे तो 10 बॉक्स लेकर भी मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) की शुरुआत कर सकते हैं।  मान लीजिए अगर 40 किलोग्राम प्रति बॉक्स शहद मिले तो कुल शहद 400 किलोग्राम मिलेगा ₹ 350 प्रति किलो के हिसाब से 400 किलो शहद बेचने पर 1 लाख 40 हजार की कमाई होगी। यदि प्रति बॉक्स खर्च 3500 रुपए आता है तो कुल खर्च 35000 रुपए होगा और शुद्ध लाभ 10लाख 50 हजार रुपए होगा। 

आपको बता दें, मधमुक्खी पालन व्यवसाय (madhumakhi palan) हर साल मधुमक्खियों की संख्या के बढ़ने के साथ कम से कम 3 गुना बढ़ जाता है अर्थात 10 पेटी से शुरू किया गया व्यापार 1 साल में 25 से 30 पेटी भी हो सकता है।

कैसे करें मधुमक्खी पालन से कमाई (How to earn from beekeeping)

पहले ही तय कर लें कि आपके मधुमक्खी फार्म व्यवसाय (madhumakhi palan) का आकार क्या होने वाला है। यदि आप निर्माण कर रहे हैं, तो आपको इसके विज्ञान और प्रौद्योगिकी की अच्छी समझ होनी चाहिए। मधुमक्खी फार्म व्यवसाय एक आसान काम नहीं है इसके लिए आपको जानकार लोगों से सलाह भी लेना होगा। 

आपका व्यवसाय बड़ा है तो इसके साथ ही तय करें कि आपकी बाजार में पहुंच क्या होगी। चूंकि आपके पास बेचने के लिए मधुमक्खी का शहद है। क्या आप इसे ऑनलाइन बाजार में लाने के लिए तैयार हैं? अगर यह एक ऑनलाइन स्टोर के रूप में भी स्थापित किया गया है, तो आप भंडारण, पैकेजिंग और वितरण का प्रबंधन कैसे करेंगे?

यदि ग्रामीण अंचलों में किसान अपने शहद को किसी संस्थान के द्वारा बेचें तो भी उन्हें मुनाफा होगा और यदि यह संभव नहीं है तो वह खुद ही ग्रामीण अंचलों में स्वयं किसी बोतल या पैकेट में पैक करके शहद को बेच सकते हैं जिससे कम लागत में अधिक मुनाफा पा सकते हैं क्योंकि कोरोना जैसी बस एक महामारी में इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए शहद की मांग अत्यधिक बढ़ गई है। इसलिए यदि शहद या कोई भी सामान शुद्ध हो तो बेचने में बहुत कठिनाई नहीं होती है।

आशा है, इस ब्लॉग में मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) से जुड़ी दी गई जानकारियों से मेरे सभी किसान मित्र संतुष्ट होंगे। यदि आप भी कोई व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) अवश्य अपनाएं। 

ये भी देखें-

मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए पत्रिकाओं का अध्ययन भी करें इसके अलावा अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण अवश्य लें।

धन्यवाद

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