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सरपंच के कार्य और अधिकार | Sarpanch ke karya

पंचायती राज में गांव के मुखिया को सरंपच (Sarpanch) कहा जाता है।

Sarpanch ke karya: हमारा देश गांवों का देश है। हमारे देश में गांव, शहर, राज्य और पूरे देशभर में लोकतंत्र प्रणाली लागू है। हमारे देश में ग्राम पंचायत के मुखिया का भी चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होता है। पंचायती राज में गांव के मुखिया को सरंपच (Sarpanch) कहा जाता है। 1992 में 73वें संविधान संशोधन के द्वारा ग्राम पंचायतों को कई प्रकार के अधिकार दिए गए हैं। 

इस संशोधन को पंचायती राज अधिनियम-1992 के रूप में जाना जाता है। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण भारत में गांव स्तर पर ग्राम पंचायत, ब्लॉक स्तर पर क्षेत्र पंचायत और जिला स्तर पर जिला परिषद (त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था) के रूप शासन का विकेंद्रीकरण किया गया है।

तो आइए, द रूरल इंडिया के इस ब्लॉग में ग्राम पंचायत और सरपंच के अधिकार (Rights of Gram Panchayat and Sarpanch) को विस्तार से जानें। 

इस ब्लॉग में आप मुख्य रूप से जानेंगे-

  • ग्राम पंचायत क्या है?
  • पंचायती राज अधिनियम 1992
  • ग्राम पंचायतों में सरपंच की भूमिका
  • सरपंच का चुनाव
  • सरपंच के अधिकार 
  • सरपंच के कार्य
  • सरपंच को हटाने की प्रक्रिया

ग्राम पंचायत क्या है? (Gram panchayat kya hai)

73वें संविधान संशोधन में सबसे निचले स्तर पर गांव की शासन व्यवस्था को ग्राम पंचायत (Gram panchayat) कहा जाता है। ग्राम पंचायत गठन प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल में पंचायत चुनाव के द्वारा होता है। ग्राम पंचायत में निर्वाचित सरपंच और वार्ड पंच होते हैं। इनका चुनाव गांव के मतदातों द्वारा किया जाता है। 

पंचायती राज अधिनियम 1992 (Panchayati Raj Act 1992)

अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर में पंचायती राज अधिनियम 1992 क्या है?  तो आपको बता दें, भारत के स्वंत्रता के बाद 1992 तक गांवों को कुछ खास अधिकार नहीं दिए गए थे। पंचायतों का चुनाव भी अनिवार्य नहीं था, परन्तु ग्रामीण विकास के लिए समय-समय पर बनी समितियों (बलवंत राय मेहता समिति, अशोक मेहता समिति, सिंधवी समिति और वी.एन गाडगिल समिति) के अनुशंसा के बाद 1992 में संसद में 73वें संविधान संशोधन करके पंचायतों में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई है। इस अधिनियम में ग्रामवासियों को कई अधिकार दिए गए हैं। इसके साथ-साथ इन पंचायतों को वित्तीय अधिकार देकर गांवों की विकास की जिम्मेदारी भी दी गई है। 

इस संशोधन द्वारा पंचायतों को कुल 29 विषयों पर काम करने का अधिकार दिया गया है। ये सभी विषय ग्रामीण भारत की जरूरतों को पूरा करती है। 

ग्राम पंचायतों में सरपंच की भूमिका (Role of Sarpanch in Gram Panchayats)

ग्राम पंचायतों में सबसे अधिक किसी पद की चर्चा होती है, तो वो है सरंपच। गांवों के विकास में सरपंच की भूमिका सबसे ज्यादा होती है। गांव का विकास सरंपचों के कंधों पर होता है। सरपंच गांव का ग्राम प्रधान यानी मुखिया होता है। इसे कई राज्यों में अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। 

सरपंच का चुनाव (Sarpanch ka chunav)

सरपंच का चुनाव प्रत्येक 5 साल के बाद राज्य चुनाव आयोग द्वारा कराया जाता है। इस चुनाव में गांव के 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग भाग लेते हैं। जिस प्रत्याशी को सबसे ज्यादा मत मिलता है, उसे गांव का सरपंच घोषित किया जाता है। इसके साथ वार्ड के वार्ड पंचो का चुनाव भी सरपंच के चुनाव के साथ ही कराया जाता है। निर्वाचित सभी वार्ड पंच और सरपंच मिलकर अगले 5 साल तक ग्राम पंचायत के विकास के लिए काम करते हैं। सरपंच की सहायता के लिए राज्य सरकार द्वारा पंचायत सचिवों की नियुक्ति की जाती है। 

सरपंच के अधिकार (powers of sarpanch) 

पंचायती राज अधिनियम 1992 लागू हो जाने के बाद ग्राम पंचायतों के सरपंचों को कई अधिकार दिए गए हैं। ग्राम सभा के गठन से लेकर ग्राम सभा की बैठक बुलाने का अधिकार सरपंच को है। सरपंच ग्राम पंचायत का अध्यक्ष होने के साथ-साथ ग्राम सभा का भी प्रधान होता है। सरपंचों को ग्राम समितियों का गठन करने का अधिकार है। 

सरपंच के कार्य (Sarpanch ke karya)

गांव में सभी प्रकार के विकास कार्यों की जिम्मेदारी सरपंच की होती है। सरपंच सरकार द्वारा संचालित सभी सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करता है। गांव में आपसी झगड़ों या विवादों को पंचों के माध्यम से सुलझाने का भी कार्य करता है। गांव में बिजली, पानी, सड़क आदि जैसी सुविधाएं प्रत्येक ग्रामवासियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होती है। 

सरपंच की सैलरी (Sarpanch ki salary)

पंचायती राज अधिनियम में सरपंच की सैलरी निर्धारित नहीं है परन्तु राज्य सरकारें मानदेय के रूप में सरपंचों को प्रत्येक महीने धनराशि देती है। आपको बता दें, ग्राम सरपंच की सैलरी राज्यों में अलग-अलग है। 

सरपंच को हटाने की प्रक्रिया (sarpanch removal process)

सरपंच अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अच्छे तरह नहीं कर रहा है या गांव की विकास को अनदेखी करके भ्रष्टाचार कर रहा है। तो पंचायती राज व्यवस्था में उसे हटाने का भी प्रावधान है। यह प्रकिया अविश्वास प्रस्ताव के जरिए होता है। सबसे पहले सरपंच के खिलाफ जिला पंचायत राज अधिकारी के पास प्रार्थना पत्र दिया जाता है। इस प्रार्थना पत्र में ग्राम पंचायतों के ⅔ सदस्यों का हस्ताक्षर होना अनिवार्य होता है। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव पत्र की अर्जी पंचायत चुनाव के 2 साल बाद ही दी जा सकती है। इसके अलावा पंचायत चुनाव के 6 महीना पहले अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाई नहीं की जाती है। 

ये तो रही सरंपच के कार्य और अधिकार की जानकारी। ऐसे ही ग्रामीण विकास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए यहां क्लिक करें। 

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